अवधी तक -महिला दिवस पर महिलाओं ने आपन रखी बात,महिला दिवस मनावय नाय बा बहादुरी,काव काव होइ का चाही मुद्दा,देखय आप सबहि रिपोर्ट।।

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के बारे में आपने सुना होगा, मीडिया में इससे जुड़ी ख़बरें भी देखी होंगी.

लेकिन यह क्यों मनाया जाता है? और कब से इसे मनाने की शुरुआत हुई?

और क्या यह विरोध प्रदर्शन है या जश्न का आयोजन? इन सारे सवालों के राज से हम पर्दा उठाते हैं और आप सब को बताते हैं कि
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन एक श्रम आंदोलन था, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने सालाना आयोजन के तौर पर स्वीकृति दी थी इस आयोजन की शुरुआत का बीज 1908 में तब पड़ा, जब न्यूयॉर्क शहर में 15 हज़ार महिलाओं ने काम के घंटे कम करने, बेहतर वेतन और वोट देने की माँग के साथ विरोध प्रदर्शन निकाला था। महिला दिवस पर एक महिला ने क्या कहा आप को सुनाते हैं और फिर महिला दिवस के बारे में और जानकारी देते हैं।

https://youtu.be/yQIiKIdaBU
*#अवधीतक ,पर महिलाओं ने महिला दिवस पर किये बटाय बातचीत, आप सभय देखय रिपोर्ट।*

1908 के एक साल बाद अमेरिकी सोशलिस्ट पार्टी ने पहली बार राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत की। लेकिन इस दिन को अंतरराष्ट्रीय बनाने का विचार क्लारा जेटकिन नाम की महिला के दिमाग़ में आया था। उन्होंने अपना ये आइडिया 1910 में कॉपेनहेगन में आयोजित इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑफ़ वर्किंग वीमेन में दिया था।इस कांफ्रेंस में 17 देशों की 100 महिला प्रतिनिधि हिस्सा ले रही थीं, इन सबने क्लारा के सुझाव का स्वागत किया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पहली बार 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी, स्विट्जरलैंड में बनाया गया। इसका शताब्दी आयोजन 2011 में मनाया गया था।

हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे मनाने की शुरुआत 1975 में तब हुई जब संयुक्त राष्ट्र ने इस आयोजन को मनाना शुरू किया. संयुक्त राष्ट्र ने 1996 में पहली बार इसके आयोजन में एक थीम को अपनाया, वह थीम थी – ‘अतीत का जश्न मनाओ, भविष्य की योजना बनाओ।

महिलाएं समाज में, राजनीति में और अर्थशास्त्र में कहाँ तक पहुँची हैं, इसके जश्न के तौर पर इंटरनेशनल वीमेंस डे का आयोजन होता है, लेकिन इस आयोजन के केंद्र में प्रदर्शन की अहमियत रही है, लिहाज़ा महिलाओं के साथ होने वाली असमानताओं को लेकर ज़ागरूकता बढ़ाने के लिए विरोध प्रदर्शन का आयोजन भी होता है।

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