यूपी/अमेठी-चिकित्सको की मेहनत रंग लाई,जनपद कोरोना में भी रहा सुरक्षित,महीनो परिवार से दूर रहकर की रोगियों की देखभाल
चंदन दुबे की रिपोर्ट
जब कोई अपनी सुरक्षा से ज्यादा आपकी सुरक्षा के लिए जिन्दगी दांव पर लगा दे।आपकी सुरक्षा के लिए लम्बे समय तक घर-परिवार से दूर रहें तो स्वाभाविक है कि आपका मन-मस्तिष्क उसके प्रति सम्मान के भाव से भर जाएगा।हर साल एक जुलाई को डॉक्टर्स डे पूरे देश में मनाया जाता है।डॉक्टर को धरती पर भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है। वह कई लोगों को उनकी जिंदगी वापस लौटाते हैं।डॉक्टरों के समर्पण और ईमानदारी के प्रति सम्मान जाहिर करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है।चिकित्सक जिंदगी और मृत्यु के बीच जूझ रहे मरीजों का न सिर्फ इलाज करते हैं बल्कि उन्हें एक नया जीवन भी देते हैं इसलिए उन्हें धरती का भगवान खुदा का दूसरा रूप भी कहा जाता है।चिकित्सकों के समर्पण और ईमानदारी की तारीफ की जाए तो शब्द कम पड़ जाएगा।इस बात का उदाहरण पिछले कुछ महीनों से पूरे देश में करोना महामारी के चलते जो हालात उत्पन्न हुए हैं,वह काफी भयावह और चिंताजनक रहे,ऐसी स्थिति में अगर कोई अपनी जान की परवाह किए बगैर डटकर लोगों की सुरक्षा कर रहा है तो वह चिकित्सक,जो कि महीनों अपने घर परिवार से दूर रहकर कोरोना वायरस मरीजो का इलाज व सेवा कर रहे हैं,जनपद के जिला संयुक्त चिकित्सालय में एल्वन कोविड-19 अस्पताल में सेवा कर चुके डा0 आरिफ इकबाल,डॉ0 संजय गुप्ता,डॉ आशुतोष,डॉ.अजय सोनी डॉ0 रविंद्र यादव,डॉ.नीरज सहित स्टाफ नर्स गीता, सवाना, रोशनी, पूजा, आदि लोगों ने कोरोना अस्पताल में सेवा का कार्य किया।
डॉ0 इकबाल आरिफ ने बताया कि घर और परिवार से दूर रहकर भी कम समय में भी लगभग 140 मरीजों को डब्ल्यूएचओ की गाइड लाइन के अनुसार देखभाल की।जिसका परिणाम आज हमारा जिला फिर से ग्रीन जोन की तरफ अग्रसर है, वर्तमान समय में 10 मरीज के आसपास है,जो जल्द ही स्वस्थ होकर घर जाएंगे।गौरतलब है कि एक जुलाई देश के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ बिधान चंद्र राय को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए इनकी जयंती और पुण्य तिथि पर से मनाया जाता है,डॉक्टर राय का जन्म 1 जुलाई को बिहार के पटना जिले में हुआ था डॉ0राय को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था 80 वर्ष की आयु में 1 जुलाई को ही इनकी मृत्यु ही हो गई थी इसीलिए प्रत्येक 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के रूप में मनाया जाता है।