@यूपी/अमेठी-वीएचएनडी कार्यक्रम की सत्यता की हकीकत जानने निकली जनपदीय टीम
चंदन दुबे की रिपोर्ट
कहा स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं का लाभ जनता को मिले
जनपद में जनमानस का स्वास्थ्य विभाग के प्रति विश्वास बनाये रखना और समुदाय में आवश्यक मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और परिवार नियोजन की सेवाएं मुहैया कराना भी बहुत ही जरूरी हैं।किसी भी बीमारी के गंभीर रूप लेने और मातृ-शिशु मृत्यु दर को बढ़ने से रोकने के लिहाज से भी यह बहुत जरूरी है।
इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 आरएम श्रीवास्तव ने निर्देश पर जनपद में चलाये जा रहे वीएचएनडी कार्य क्रम की सत्यता की हकीकत जाने के उद्देश्य से विभाग के डीसीपीएम अशोक यादव,डीएचई आईओ शालू गुप्ता एवं डीएफपीसी अर्चना श्रीवास्तव की टीम सिंहपुर विकास खंड के ग्राम खैरूलागंज पहुची,जहां पर आशा रामावती एवं एएनएम चन्द्रा देवी गांव की गर्भवती महिलाओ, किशोरियों एवं धात्री महिलाओं को विभाग द्वारा चलायी जा रहा योजनाओं से लाभान्वित करा रही थी।
इस मौके पर डीसीपीएम अशोक यादव ने टीकाकरण,विटामिन ए बच्चो एवं गर्भवती महिलाओं के वजन,किशोरियों को आयरन वितरण,स्वास्थ्य संबन्धी परिक्षण,अगला टीकाकरण की तिथि, मौसमी बीमारियों डायरिया,दस्त,बुखार, एवं कोरोना जैसी महामारी को लेकर जानकारी प्राप्त की।उन्होने कहा कि ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस (वीएचएनडी) के आयोजन को लेकर भी कई जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं।आशा कार्यकर्ता उन गर्भवती की सूची तैयार करेंगी,जिनमें कोरोना के कोई लक्षण जैसे-सर्दी,खांसी,बुखार और सांस फूलना आदि नजर आते हैं। सोशल डिस्टेंशिंग, मास्क पहनने,साबुन से हाथ धोने और संक्रमण रोकथाम सम्बन्धी निर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा।आशा कार्यकर्ता द्वारा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर भी सेवाएं लेने के लिए गर्भवती को सोशल डिस्टेंशिंग का पालन करते हुए जाने के लिए प्रेरित किया जाए।
वीएचएनडी सत्र के दौरान हाथ धुलने के लिए एक कार्नर बनाया जाए,जहाँ पर साबुन-पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धुलकर लाभार्थी और उनके देखभाल करने वाले अंदर आ सकें।एक समय पर चार से ज्यादा लाभार्थी स्थल पर न जुटने पाएं,इसके लिए उन्हें पहले से तय समय पर ही आने को प्रेरित किया जाए,प्रत्येक लाभार्थी के टीकाकारण और किसी भी जांच से पहले एएनएम को सेनेटाइजर से हाथों को अच्छी तरह से साफ करने को कहा गया है।यदि किसी प्रथम पंक्ति कार्यकर्ता में इन्फ्लुएंजा यानि सर्दी खांसी बुखार के लक्षण नजर आयें तो उनको सत्र के दौरान ड्यूटी पर न बुलाया जाए। इसके अलावा लाभार्थी के साथ सहयोगी के रूप में ऐसे लोग न आने पाएं जिन्हें सर्दी-खांसी या बुखार की शिकायत है। डीएचईआईओ शालू गुप्ता ने कहा कि गृह आधारित नवजात देखभाल के दौरान आशा सोशल डिस्टेंशिंग का पालन करें,गृह भ्रमण के दौरान मां-बच्चे को बिना छुए बात करें,गृह भ्रमण से पहले और बाद में साबुन-पानी से 20 सेकंड तक अच्छी तरह से हाथ धुलें,गृह भ्रमण के दौरान आशा कार्यकर्ता मास्क अवश्य पहनें,उच्च जोखिम वाले नवजात को प्राथमिकता के आधार पर सेवाएं सुनिश्चित कराएँ,कंगारू मदर केयर के बारे में जागरूक करें,बच्चे को जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराने को प्रेरित करें और छह माह तक केवल स्तनपान कराने के फायदे बताएं।