कूरेभार सुल्तानपुर-आधुनिकता की चकाचौंध में गुम हो रही कुम्हारों की कला

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दीपावली के समय जो कुंम्हार दम भरने की फुरसत नही पाते थे,वही आज मिट्टी के चंद दिए बनाकर आस पास के गांवों व बाजारों में बेचने के लिए मजबूर है।अब बाजारों में दिए की जगह आधुनिक तरह की तमाम रंग बिरंगी विजली की झालरों ने ले लिया है।जिसके चलते मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुंम्हारों के सामने समस्या ही समस्या मुहँ बाए खड़ी है।कूरेभार विकास खंड के सेदखानपुर,लोकेपर,निदूरा,पटना,दखिनवारा सहित दर्जनों गांवों में दीपावली के पर्व पर हजारों घरों को रोशनी से जगमग करने वाले कुंम्हारों की जिंदगी में आज अंधेरा ही अंधेरा है।आधुनिकता की इस चकाचौंध में कुंम्हारों के सामने जीवन यापन का संकट खड़ा कर दिया है।आलम यह है कि हाड़तोड़ मेहनत व अपनी कला के चलते मिट्टी के दिये व दूसरे बर्तन बनाने वाले कुंम्हारों को आज दो वक्त की रोटी के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

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