भदैया ब्लॉक में नियमों की धज्जियां,सफाई कर्मियों से कराई जा रही दोहरी ड्यूटी

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भदैया ब्लॉक में नियमों की धज्जियां,सफाई कर्मियों से कराई जा रही दोहरी ड्यूटी, गांवों की सफाई व्यवस्था ठप
फसल सर्वे के नाम पर सेवा नियमावली का खुला उल्लंघन
सुल्तानपुर

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सुल्तानपुर जिले में शासनादेश और सरकारी सेवा नियमावली की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है। भदैया ब्लॉक में पंचायत सहायकों और सफाई कर्मियों से नियमों के विपरीत रबी फसल सर्वे का कार्य कराया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन कर्मचारियों से दोहरी ड्यूटी ली जा रही है और दोनों कार्यों का भुगतान भी किया जा रहा है, जिससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि वित्तीय पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
भदैया ब्लॉक की 73 ग्राम पंचायतों के 128 गांवों में इस समय रबी फसल का सर्वे चल रहा है। नियमों के अनुसार यह कार्य राजस्व और कृषि विभाग के कर्मियों द्वारा किया जाना चाहिए, लेकिन यहां बिना किसी सक्षम अधिकारी के लिखित आदेश के 42 सफाई कर्मियों और 14 पंचायत सहायकों को इस कार्य में लगा दिया गया है। इसके अलावा दर्जनों निजी कर्मियों के भी सर्वे कार्य में लगे होने की जानकारी सामने आई है।
न कार्यमुक्ति, न आदेश — फिर भी दोहरी जिम्मेदारी
सबसे गंभीर पहलू यह है कि फसल सर्वे में लगाए गए सफाई कर्मियों को उनके मूल तैनाती वाले गांवों से कार्यमुक्त नहीं किया गया। कागजों में उनकी नियमित सफाई ड्यूटी भी चालू दिखाई जा रही है और पूरा वेतन भी उन्हें मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर फसल सर्वे के लिए उन्हें अलग से पारिश्रमिक देने की तैयारी है।
जबकि सेवा नियमावली स्पष्ट रूप से कहती है कि किसी भी कर्मचारी से अतिरिक्त या दूसरा कार्य लेने से पहले सक्षम अधिकारी की अनुमति और मूल कार्य से कार्यमुक्ति अनिवार्य है।
पांच रुपये प्रति गाटा का खेल
सूत्रों के मुताबिक फसल सर्वे में प्रति गाटा पांच रुपये का भुगतान निर्धारित है। एक गांव में औसतन दो से तीन हजार से अधिक गाटे होते हैं। एक कर्मी दिनभर में अधिकतम 100 से 200 गाटों का ही सर्वे कर पाता है। ऐसे में पूरे महीने तक सफाई कर्मियों को गांवों की सफाई व्यवस्था से हटाकर सर्वे कार्य में लगाए जाने की चर्चा है, जबकि कागजों में सफाई व्यवस्था सुचारू दिखाई जा रही है। नतीजतन कई गांवों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
डीपीआरओ बोले— होगी जांच
जिला पंचायत राज अधिकारी अभिषेक शुक्ला ने स्पष्ट किया कि फसल सर्वे के लिए उनके स्तर से कोई आदेश जारी नहीं किया गया है और उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं थी। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों से दोहरी ड्यूटी लेना सेवा नियमावली के खिलाफ है।
“मामले की जांच कराई जाएगी और संबंधित एडीओ पंचायत से स्पष्टीकरण लिया जाएगा। नियम उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई तय है,” — डीपीआरओ।
जवाबदेही से बचते नजर आए एडीओ पंचायत
सफाई कर्मियों और पंचायत सहायकों को फसल सर्वे में लगाने वाले एडीओ पंचायत सतीश चंद्र श्रीवास्तव जवाबदेही से बचते नजर आए। कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि एडीओ पंचायत द्वारा आए दिन मौखिक आदेश जारी कर सफाई कर्मियों को अन्य कार्यों में लगाया जाता है, वह भी बिना किसी उच्च अधिकारी की अनुमति और बिना लिखित कार्यमुक्ति आदेश के।
बड़ा सवाल— हादसे की जिम्मेदारी किसकी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बिना आदेश और बिना कार्यमुक्ति के दूसरी जगह ड्यूटी के दौरान किसी सफाई कर्मी के साथ कोई दुर्घटना या अनहोनी होती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
यह मामला केवल नियम उल्लंघन का नहीं, बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी धन के दुरुपयोग से भी जुड़ा हुआ है।

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