शंकराचार्य के समर्थन में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य

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खुलकर शंकराचार्य के समर्थन में उतरे प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य
नई दिल्ली/सुलतानपुर।
शंकराचार्य से जुड़े हालिया विवाद को लेकर देश के प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य खुलकर उनके समर्थन में सामने आए हैं। अनिरुद्धाचार्य ने अपने बयान में प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि वह शंकराचार्य के चरणों में गिरकर माफी मांगे, क्योंकि संत समाज का अपमान पूरे सनातन परंपरा का अपमान है।


कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने अपने वक्तव्य में धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों का हवाला देते हुए कहा कि सनातन परंपरा में क्षमा सर्वोच्च गुण है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा,
“भगवान राम ने भी शरण में आए रावण को क्षमा करने की बात कही थी, ऐसे में संतों के साथ कठोर व्यवहार किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।”
अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि संत समाज केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन ही नहीं करता, बल्कि समाज को नैतिक दिशा भी देता है। ऐसे में संतों के सम्मान से समझौता करना देश की सांस्कृतिक जड़ों को कमजोर करने जैसा है।
अपने वक्तव्य को और प्रभावशाली बनाते हुए उन्होंने हिंदी साहित्य का उदाहरण भी प्रस्तुत किया। उन्होंने रीतिकाल के महान कवि बिहारी की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख किया—
“देखन में छोटे लगें, घाव करें गंभीर”
अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि यह पंक्तियां आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं और उन्होंने आधुनिक संदर्भ में रीतिकालीन चेतना को जीवंत कर दिया है। उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन मिल रहा है और बड़ी संख्या में लोग इसे संत समाज की आवाज बता रहे हैं।
धार्मिक संगठनों और संत समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि अनिरुद्धाचार्य का यह बयान न केवल शंकराचार्य के समर्थन में है, बल्कि सनातन मूल्यों की रक्षा का स्पष्ट संदेश भी देता है। वहीं प्रशासन की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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