@यूपी/अमेठी-परंपरा के अनुसार टीकरमाफी आश्रम में शिष्यों ने विधि विधान से गुरु की पूजा अर्चना कर लिया गुरु का आशीर्वाद
चंदन दुबे की रिपोर्ट
क्षेत्र में गुरु पूर्णिमा को धूमधाम से मनाया गया।आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा भी कहा जाता है,इस दिन गुरु पूजा का विधान है।क्षेत्र के स्वामी परमहंस आश्रम टीकरमाफी में शिष्यों ने स्वामी परमहंस महाराज के साथ-साथ पीठाधीश्वर स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी का विधि विधान से वैदिक मंत्रों से पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया।
स्वामी हर्ष चैतन्य ब्रह्मचारी बताते हैं कि शास्त्रों में आषाढ़ मास का बहुत ही महत्व है।कहते हैं कि गुरु पूर्णिमा के दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं।ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं।न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी।इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं।जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है,वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान,शान्ति,भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है,बताते है कि इसी दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वेपायन व्यास का जन्मदिन भी है वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे।उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।भक्तिकाल के संत घीसादास का भी जन्म इसी दिन हुआ था वे कबीरदास के शिष्य थे।गुरु तथा देवता में समानता के लिए एक श्लोक में कहा गया है कि जैसी भक्ति की आवश्यकता देवता के लिए है वैसी ही गुरु के लिए भी।बल्कि सद्गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार भी संभव है।गुरु की कृपा के अभाव में कुछ भी संभव नहीं है।