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जिम्मेदार अनजान, खतरों मे है बच्चों की जान -रायबरेली

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जिम्मेदार अनजान, खतरों मे है बच्चों की जान

रायबरेली : गुजरात के सूरत में आग की दिल दहला देने वाली घटना से पूरा देश कांप उठा है। जिले में भी ऐसी कई कोचिग संस्थाएं चल रही हैं जहां पर मानकों की कौन कहे, सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम तक नहीं है। ग्रामीण अंचलों तो दूर, यहां शहर में खुलेआम नियमों को धता बताकर छात्रों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। हाल यह है कि संकरी गलियों और बहुमंजिली इमारतों में बिना किसी सुरक्षा और सुविधा के कोचिग सेंटर सुबह से लेकर देर शाम तक चलते हैं। यहां पर अगर सूरत जैसी घटना हुई तो दमकल की गाड़ियां मौके तक नहीं पहुंच सकतीं। हर पल खतरे में रहने वाले बच्चों के जीवन को लेकर जिम्मेदार पूरी तरह से अनजान बने हुए हैं। यहां तक की शिक्षा विभाग और अग्निशमन विभाग के जिम्मेदार भी खामोशी की चादर ओढ़े सो रहे हैं।

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इनसेट

डिग्री कॉलेज चौराहा बना कोचिग हब –

शहर का डिग्री कॉलेज चौराहा कोचिग हब बनता जा रहा है। यहां कचहरी रोड, कैनाल रोड, जेल गार्डेन और ओवरब्रिज की ओर जाने वाले मार्ग पर करीब डेढ़ दर्जन कोचिग संचालित हैं। सबसे खास बात यह है कि इसमें कई तो दो से तीन मंजिल में कोचिग चला रहे हैं। वहीं जिम्मेदार यह कहकर मुंह मोड़ रहे है कि यहां पर दूसरी और तीसरी मंजिल पर कोचिग नहीं चल रही हैं।

टिन शेड और छप्पर में भी होती पढ़ाई –

फायर स्टेशन के सामने कुछ ऐसी भी कोचिग संस्थाएं हैं, जो टिन शेड और छप्पर के नीचे चल रही हैं। दिन भर सैकड़ों की तादाद में साइकिलें खड़ी होती हैं। मानक छोड़िए, गर्मी से बचने के लिए पर्याप्त पंखे तक नहीं लगे हैं।

मान्यता 162 की, तादाद पांच सौ के पार –

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शिक्षा विभाग में महज 162 कोचिग ही पंजीकृत है। नियमानुसार तीन साल के लिए कोचिग को मान्यता दी जाती है। इसके बाद रिन्यूअल कराया जाता है। अब वर्ष 2016-17 में 5, 17-18 में 114 और 18-19 में 43 कोचिग को मान्यता दी गई है। इसके विपरीत शायद ही जिले का कोई कस्बा होगा जहां पर कोचिग न हो। मान्यता के नाम पर सिर्फ खानापूरी कर जेब भरने का काम चल रहा है।

प्रशासन की मिलीभगत से चल रहीं कोचिग –

सूरत की घटना को लेकर अभिभावक भी भयभीत हैं। अभय सिंह और शीलू सिंह कहते हैं कि इस पर अंकुश लगाने का काम प्रशासन का है। सब उनकी मिलीभगत से चल रहा है। सोनू त्रिवेदी और विवेक सिंह का कहना है कि शिक्षा विभाग की साठगांठ के चलते अधूरे मानकों पर ही कोचिग की मान्यता दे दी जाती हैं।

फीस पूरी, पर नहीं मिलतीं सुविधाएं –

छात्रा शैलजा सागर और शैल कहती है कि फीस तो पूरा लिया जाता है, लेकिन सुविधाएं कुछ नहीं रहती है। सुरक्षा तक के कोई इंतजाम नहीं है। छात्र कपिल गुप्ता और प्रशांत जायसवाल कहते है कि अग्निशमन यंत्र की कौन कहे पीने के लिए पानी तक की व्यवस्था नहीं रहती है।

कोट –

सभी कोचिग संचालकों को पत्र जारी कर दिया गया है। टीम गठित कर जांच कराई जाएगी। मानकों को पूरा नहीं करने वाले कोचिग का पंजीकरण निरस्त कर दिया जाएगा।-डॉ. चंद्रशेखर मालवीय, डीआइओएस कोट

अग्निशमन अधिकारी के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। कोचिग में जाकर सुरक्षा के मानकों की जांच कराई जा रही है। साथ ही डीआइओएस से कोचिग की सूची मांगी गई है।-आरके पांडेय, मुख्य अग्निशमन अधिकारी

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