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रायबरेली-जिले के तीस स्कूल बनेंगे माडल स्कूल

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जिले के तीस स्कूल बनेंगे माडल स्कूल

रिपोर्ट- हिमांशु शुक्ला

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रायबरेली। बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित 30 विद्यालयों के दिन बहुरने वाले हैं, क्योंकि इन विद्यालयों को मॉडल स्कूल बनाया जाएगा। यह मॉडल स्कूल सिर्फ कहने के लिए नहीं होंगे, बल्कि इनमें कान्वेंट स्कूलों जैसी हर सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। देखने में भी यह सरकारी स्कूल नहीं, बल्कि नामचीन प्राइवेट स्कूल जैसे नजर आएंगे। शासन ने हर ब्लॉक में एक हिंदी माध्यम तो एक इंग्लिश मीडियम परिषदीय विद्यालय को मॉडल स्कूल बनाने का फैसला लिया है, जिस पर बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने बीएसए को पत्र भेजकर स्कूलों को चयनित करने के निर्देश दिए हैं।

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गौरतलब है कि इस जिले में एक नगर क्षेत्र और 18 ब्लॉक क्षेत्रों में 2600 से अधिक परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें से गत शिक्षा सत्र में 95 स्कूल तो इस सत्र में 114 विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम से संचालित किया गया। इस तरह से हर ब्लॉक में 10 प्राथमिक विद्यालय तथा एक-एक जूनियर हाईस्कूल का संचालन अंग्रेजी माध्यम से हो रहा है। परिषदीय विद्यालयों में अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन हो और उन्हें हर सुविधा दिलाई जा सके, इसके लिए हर ब्लॉक से दो-दो स्कूल चिन्हित कर उन्हें मॉडल बनाया जाना है। वैसे तो यहां पर 19 क्षेत्र हैं, लेकिन शासन ने 15 ब्लाकों में 30 स्कूल चिन्हित करके उन्हें मॉडल रूप देने के लिए सात करोड़ 14 लाख रुपये देने का प्रावधान किया है। प्रत्येक स्कूल में 23.80 लाख रुपये से चारदीवारी, लैब, लाइब्रेरी, खेलकूद के संसाधन, डिजिटल क्लासरूम, प्रकाश और पेयजल, मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराए जाएंगे। हर स्कूल को मिलने वाली 23.80 लाख रुपये में से बाउंड्रीवॉल पर एक लाख, प्रसाधन पर 50 हजार, टाइल्स और कोटा स्टोन पर 6.25 लाख, फर्नीचर पर 3.50 लाख, सोलर सिस्टम पर पांच लाख, पुस्तकालय एवं लैब पर एक लाख, डिजिटल क्लास रूम पर एक लाख, व्हाइट बोर्ड पर 25 हजार, पेंटिंग और रूपांतरण पर डेढ़ लाख, रनिंग वाटर सुविधा पर डेढ़ लाख, खेल सामग्री पर 30 हजार, माइक एंड ड्रम सिस्टम पर 50 हजार, वाटर कूलर पर 30 हजार, झूले पर 50 हजार, खिलौने पर 10 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे।

इनसेट

” निदेशक का पत्र मिलने के बाद विद्यालयों को चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हर ब्लॉक से एक हिंदी मीडियम और एक इंग्लिश मीडियम स्कूल चयनित कर उसे मॉडल स्कूल बनाना है। उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार मॉडल स्कूलों में हर सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।”
– पीएन सिंह, बीएसए, रायबरेली

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